मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉक्टर बिनायक सेन को अदालत ने देशद्रोह मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उनके साथ नक्सल विचारक नारायण सान्याल और कोलकाता के कारोबारी पियूष गुहा को भी इस मामले में उम्र कैद दी गई है।
सेन के वकील ने कहा है कि वह निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। सेन की पत्नी एलिना और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैसले को निराशाजनक बताया।
इन तीनों पर माओवादियों से संबंध रखने, देश के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप था। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश बी.पी. वर्मा ने तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए [राजद्रोह] और 120बी [षड्यंत्र] तथा छत्तीसगढ़ विशेष लोक सुरक्षा कानून के तहत दोषी ठहराया। इस संबंध में सान्याल और गुहा पिछले दो-ढाई साल से जेल में कैद हैं।
-सान्याल के संदेशवाहक हैं बिनायक सेन : 58 वर्षीय डॉक्टर और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के उपाध्यक्ष [पीयूसीएल] सेन पर आरोप था कि उन्होंने जेल में बंद सान्याल के संदेशवाहक के तौर पर काम किया और भूमिगत माओवादियों तक संदेश पहुंचाए।
सेन को 14 मई 2007 को बिलासपुर में गिरफ्तार किया गया था और पिछले साल मई में हाई कोर्ट से जमानत मिलने के पहले वह दो साल तक जेल में रहे। जबकि 67 वर्षीय सान्याल को आंध्र प्रदेश के खम्मम में जनवरी 2006 में और 35 वर्षीय गुहा को एक साल बाद मई में गिरफ्तार किया गया था। दोनों तब से जेल में हैं। उन पर आरोप है कि वे नेटवर्क स्थापित करने में माओवादियो की मदद कर रहे थे।
उम्र कैद के अलावा छत्तीसगढ़ विशेष लोक सुरक्षा कानून के तहत तीनों को दो साल की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। साथ ही तीनों को गैरकानूनी गतिविधियां निवारण कानून के तहत भी दोषी करार देते हुए पांच साल और एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। ये सारी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
सेन के वकील ने कहा है कि वह निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। सेन की पत्नी एलिना और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैसले को निराशाजनक बताया।
इन तीनों पर माओवादियों से संबंध रखने, देश के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप था। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश बी.पी. वर्मा ने तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए [राजद्रोह] और 120बी [षड्यंत्र] तथा छत्तीसगढ़ विशेष लोक सुरक्षा कानून के तहत दोषी ठहराया। इस संबंध में सान्याल और गुहा पिछले दो-ढाई साल से जेल में कैद हैं।
-सान्याल के संदेशवाहक हैं बिनायक सेन : 58 वर्षीय डॉक्टर और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के उपाध्यक्ष [पीयूसीएल] सेन पर आरोप था कि उन्होंने जेल में बंद सान्याल के संदेशवाहक के तौर पर काम किया और भूमिगत माओवादियों तक संदेश पहुंचाए।
सेन को 14 मई 2007 को बिलासपुर में गिरफ्तार किया गया था और पिछले साल मई में हाई कोर्ट से जमानत मिलने के पहले वह दो साल तक जेल में रहे। जबकि 67 वर्षीय सान्याल को आंध्र प्रदेश के खम्मम में जनवरी 2006 में और 35 वर्षीय गुहा को एक साल बाद मई में गिरफ्तार किया गया था। दोनों तब से जेल में हैं। उन पर आरोप है कि वे नेटवर्क स्थापित करने में माओवादियो की मदद कर रहे थे।
उम्र कैद के अलावा छत्तीसगढ़ विशेष लोक सुरक्षा कानून के तहत तीनों को दो साल की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। साथ ही तीनों को गैरकानूनी गतिविधियां निवारण कानून के तहत भी दोषी करार देते हुए पांच साल और एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। ये सारी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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