हीरा तराशी में दुनिया का सरताज

Saturday, February 5, 2011

मुंबई, हीरा तराशी में दुनिया का सरताज भारत अब इसके कारोबार का भी सबसे बड़ा हब बनेगा। रविवार को यहां भारत डायमंड बोर्स (बीडीबी) की शुरुआत के साथ ही यह हीरों के व्यापार-विनिमय का भी अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनने जा रहा है। बेल्जियम के एंटवर्प को पछाड़ने के मकसद से दुनिया के इस सबसे बड़े हीरा एक्सचेंजकी स्थापना की गई है। अभी प्रमुख हीरा एक्सचेंज (विनिमय बाजार) बेल्जियम, इजरायल या दुबई में हैं।
भारत ने अब तक कच्चे हीरों की तराशी में अपनी विशेष पहचान बना रखी थी। यह काम मूलत: गुजरात के सूरत में होता है, जबकि मुंबई से इन तराशे हीरों का व्यापार किया जाता है। हालांकि इस कारोबार के लिए यहां कोई बड़ा सेंटर नहीं था। हीरा व्यापारी दक्षिण मुंबई की पंचरत्न बिल्डिंग के बाहर सड़क पर ही लाखों-करोड़ों का कारोबार कर डालते थे। अब मुंबई के बांद्रा-कुर्लाकॉम्प्लेक्स में नौ मंजिली शानदार इमारत में शुरू हो रहे बीडीबी में देश-विदेश के व्यापारी पूरी सुरक्षा के साथ कारोबारी सौदे कर सकेंगे। इस इमारत के निर्माण में 1100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
सुविधा के लिए इसी इमारत में सीमा शुल्क, कई बैंक व क्लियरिंग एजेंटके दफ्तर भी होंगे। भारत डायमंड बोर्स के अध्यक्ष अनूप मेहता का कहना है कि यह एक्सचेंज हीरों के साथ-साथ रत्न-आभूषण के व्यवसाय में भी देश को दुनिया का केंद्र बनाने में मददगार साबित होगा। यह एक्सचेंज शुरू होने के बाद देश के करीब 400 बड़े हीरा निर्यातक यहां से अपना कारोबार कर सकेंगे। यहां रोजाना 25 से 27 हजार लोग अपने व्यवसाय के सिलसिले में आएंगे।
इससे आनेवाले पांच वर्षो में भारत से हीरा निर्यात में 10 से 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। बीडीबी की परिकल्पना वर्ष 1984 में कुछ हीरा व्यवसाइयों ने मिलकर की थी। इस विश्वस्तरीय डायमंड एक्सचेंज में दी जा रही सुविधाओं के कारण ब्राजील व बेल्जियम समेत हीरा व्यवसाय में अग्रणी सभी देशों के व्यापारी यहां अपना कारोबार चमकाने आएंगे। भारत की हैसियत : दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा हीरों की कटाई, घिसाई और पॉलिशिंग का काम भारतीय कारीगर ही करते हैं। इसमें 8 लाख 50 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। वर्तमान में यहां 27 से 28 अरब डॉलर का हीरा कारोबार हो रहा है
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