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Saturday, February 5, 2011

पाक-भारत संबंध

नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान बातचीत करने पर राज़ी हुए और पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर दिल्ली गए जहाँ उन्होंने भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव से मुलाक़ात की.उस के बाद भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव इस्लामाबाद पहुँचीं और दोनों विदेश सचिवों ने भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता के लिए एजेंडा तय किया और फैसला हुआ कि 15 जुलाई को दोनों विदेश मंत्री इस्लामाबाद में बातचीत करेंगे.

डेविड हेडली और मुंबई हमलावरों के पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों से संबंध निश्चित रुप से बातचीत की नाकामी के कारण बने. अब दोनों देशों वार्ता की नाकामी के लिए एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं

उस से पहले सार्क शिखर सम्मेलन के अवसर पर भूटान में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुलाक़ात की और बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई.

इस्लामाबाद में दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक के बाद भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम सार्क सम्मेलन में भाग लेने केलिए इस्लामाबाद पहुँचे और अपने समकक्ष रहमान मलिक से मुलाक़ात की और मुंबई हमलों के अभियुक्तों को न्याय के कटघरे कर पहुँचाने के लिए दबाव डाला.

जुलाई में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने इस्लामाबाद में बातचीत की लेकिन वह भी सफल नहीं रही.इस मुलाक़ात के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चलता रहा

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ और अन्य राजीनीतिक दलों के भारी दबाव के बाद संसद ने संविधान के 18वें संशोधन को पारित कर राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के अधिकार घटा कर प्रधानमंत्री को दे दिए.

इस वर्ष न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी रही. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने भ्रष्टाचार से संबंधी सभी मामले फिर से चलाने के आदेश दिए और इस बीच गृहमंत्री रहमान मलिक और कई दूसरे मंत्रियों के इस्तीफ़े की माँग उठी.

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी सहित गृहमंत्री रहमान मलिक, क़ानून मंत्री बाबर आवाण और पीपुल्स पार्टी के कई सांसदों के ख़िलाफ भ्रष्टाचार के मुक़दमे दर्ज हैं.

पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने कई बार संकट का सामना किया और गठबंधन सरकार में शामिल अन्य दलों के साथ कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए. आख़िरकार जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फ़ज़लुर्रहमान गुट सरकार से अलग हो गई.

इस साल सुरक्षा बलों का चरमपंथियों के ख़िलाफ़ क़बायली इलाक़ों में अभियान जारी रहा और सेना ने कई वरिष्ठ तालिबान नेताओं को मारने का दावा किया.
 
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