राष्ट्रमंडल खेल

Saturday, February 5, 2011

राष्ट्रमंडल खेलों ने और उसके एक ही महीने के भीतर हुए एशियाड ने भारत में ओलंपिक की स्पर्द्धाओं वाले खिलाड़ियों को एक अलग पहचान दी और वे खिलाड़ी भी स्टार हो गए.

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाज़ों ने बेहतरीन निशाना साधा और सर्वाधिक पदक भारत को वहीं से मिले.

पहला स्वर्ण पदक अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग की जोड़ी ने दिलाया और उसके बाद पदकों की बौछार हो गई.

भारत को 14 स्वर्ण सहित कुल 30 पदक हासिल हुए पर यही निशानेबाज़ जब एशियाई खेलों में गए तो वहाँ सिवाय रोंजन सोढ़ी के कोई भी निशानेबाज़ सोने का तमग़ा नहीं पा सका.

एथलेटिक्स में आश्चर्य

भारत के लिए इस साल एथलेटिक्स ने कुछ सुखद आश्चर्य प्रस्तुत किए. राष्ट्रमंडल खेलों में खचाखच भरे जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में महिलाओं के डिस्कस थ्रो में जब पदक बाँटने के बाद झंडे ऊपर चढ़े तो तीनों झंडे भारत के ही थे.

कृष्णा पूनिया ने स्वर्ण, हरवंत कौर ने रजत और सीमा एंतिल ने काँस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया.
डिस्कस थ्रो के भारतीय विजेता

राष्ट्रमंडल खेलों में डिस्कस थ्रो में कृष्णा, हरवंत और सीमा ने तीनों पदक जीत लिए

एथलेटिक्स में ही महिलाओं की चार गुणा चार सौ मीटर में अगला इतिहास बना जब भारतीय महिलाओं ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता.

भारतीय तीरंदाज़ राष्ट्रमंडल खेलों में चमके जहाँ उन्होंने तीन स्वर्ण सहित आठ पदक जीते. महिलाओं के एकल में दीपिका कुमारी ने और पुरुषों के एकल में राहुल बनर्जी ने स्वर्ण जीता.

मुक्केबाज़ी में राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को तीन स्वर्ण और चार काँस्य मिले.

मनोज कुमार, सुरंजय सिंह और परमजीत समोटा स्वर्ण जीतने में क़ामयाब हुए मगर भारत को सबसे ज़्यादा उम्मीद थी विजेंदर से.

विजेंदर इस बार भी सेमीफ़ाइनल में ही हार गए और उन्हें काँस्य से संतोष करना पड़ा.

भारत को इस साल जिम्नास्टिक्स में भी पहली बार पदक मिला जबकि आशीष कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीता.

कुश्ती में बेहतरीन प्रदर्शन

राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती ने भी भारतीय पदक तालिका में बड़ा योगदान दिया. भारतीय पुरुष और महिला पहलवानों ने 10 स्वर्ण, पाँच रजत और चार काँस्य पदक जीते.

सुशील कुमार का फ़ाइनल मुक़ाबला देखने के लिए स्टेडियम खचाखच भरा था. महिला वर्ग में बबीता, गीता और अलका तोमर रातों-रात स्टार खिलाड़ी बन गए.

भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में टेनिस से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले मगर सोमदेव देववर्मन् ने एकल का स्वर्ण पदक जीता.

सानिया मिर्ज़ा को फ़ाइनल में हारकर रजत पर रुकना पड़ा.

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले भारतीय दल की अपेक्षा 100 पदक जीतने और पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुँचने की थी.

टेबल टेनिस में भारत के अचंता शरद कमल और शुभजीत साहा की जोड़ी ने युगल मुक़ाबले का स्वर्ण जीता जबकि पिछले बार एकल का स्वर्ण जीतने वाले अचंता को इस बार काँस्य से संतोष करना पड़ा.

खेलों के अंतिम दिन 14 अक्तूबर को साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में एकल का स्वर्ण जीतकर भारत का पदक तालिका में दूसरा स्थान सुनिश्चित किया.

इससे पहले अश्विनी पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा की जो़ड़ी ने भी भारत को स्वर्ण दिलाया.

भारत ने 38 स्वर्ण सहित कुल 101 पदक जीते.
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