क्रिकेट में आम तौर पर ये साल रोमाँचक

Saturday, February 5, 2011

क्रिकेट में आम तौर पर ये साल कई रोमाँचक शृंखलाओं से भरा रहा. भारत जहाँ इस साल टेस्ट में नंबर एक की टीम होने का ख़िताब बचाने में क़ामयाब हो गया तो इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर उसे हराते हुए ऐशेज़ पर क़ब्ज़ा बरक़रार रखा.

साल की शुरुआत में भारतीय टीम का मुक़ाबला दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध दो टेस्ट में था और भारत अगर सिरीज़ हार जाता तो दक्षिण अफ़्रीका नंबर एक की कुर्सी पा सकता था.

पहला टेस्ट दक्षिण अफ़्रीका नागपुर में जीत भी गया मगर उसके बाद कोलकाता में भारत ने एक पारी और 58 रनों से दक्षिण अफ़्रीका को हराकर टेस्ट में बादशाहत क़ायम रखी.

वनडे सिरीज़ में भारत ने 2-1 से जीत हासिल की और इसी सिरीज़ के ग्वालियर वनडे में सचिन तेंदुलकर ने दोहरा शतक जड़ा.

आईपीएल

सिरीज़ के बाद तैयारी थी इंडियन प्रीमियर लीग के तीसरे सीज़न की. इस साल ये टूर्नामेंट फिर भारत लौटा था क्योंकि पिछले साल आम चुनाव के चलते सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट दक्षिण अफ़्रीका में हुआ था.

इस बार मुंबई इंडियंस ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया और चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ वो फ़ाइनल में पहुँची मगर जीत हासिल हुई महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्त्व वाले चेन्नई को.

इस बार के टूर्नामेंट में किंग्स एलेवन पंजाब का प्रदर्शन सबसे ख़राब रहा क्योंकि 14 में से वो टीम सिर्फ़ चार ही मैच जीत पाई और टीम के मालिकों में से एक प्रीति ज़िंटा का मायूस चेहरा बार-बार टेलिविज़न स्क्रीन पर आता रहा.
चेन्नई सुपर किंग्स

चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल के तीसरे सीज़न में विजेता बना

इस टूर्नामेंट के दौरान ही दो नई टीमों की घोषणा हुई जबकि सहारा की टीम ने पुणे की और रॉन्देवू स्पोर्ट्स ग्रुप ने कोच्चि की टीम ख़रीद ली.

उसके बाद आईपीएल के चेयरमैन ललित मोदी ने एक बार सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर कोच्चि के मालिकाना हक़ के बारे में सवाल उठाया और तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का नाम भी उस विवाद में घसीटा गया.

उसके बाद थरूर को इस्तीफ़ा देना पड़ा और एक तरफ़ जहाँ आईपीएल का विजेता घोषित हो रहा था तो दूसरी ओर ललित मोदी को पद से हटाए जाने की तैयारी हो रही थी.आईपीएल के इस कीचड़ की छींटें अब भी उछल रही हैं और मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है.

आईपीएल के अनुभव से निकलकर भारतीय टीम ने तुरंत रुख़ किया वेस्टइंडीज़ की ओर जहाँ ट्वेन्टी-20 का विश्व कप होना था.


भारतीय टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और इंग्लैंड ने पाकिस्तान को हराकर क्रिकेट का कोई प्रमुख टूर्नामेंट बड़े समय बाद जीता.

पाकिस्तान के लिए क्रिकेट के लिहाज़ से ये साल एक बार फिर निराशाजनक ही रहा. किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाकिस्तान का रुख़ नहीं किया और उसे घरेलू शृंखला खेलने के लिए विदेश जाना पड़ा.

मगर इंग्लैंड में जाकर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पाकिस्तान ने सिरीज़ खेली और वो 1-1 से बराबर रही. उसके बाद इंग्लैंड के विरुद्ध पाकिस्तान ने जब टेस्ट शृंखला खेली तो उसमें लगे स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोपों ने क्रिकेट को हिला दिया.

इस साल भारत ने श्रीलंका में हुए एशिया कप में ख़िताबी जीत हासिल की.

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान ही भारत आई ऑस्ट्रेलियाई टीम और भारत ने दोनों टेस्ट में उसे धूल चटा दी.

न्यूज़ीलैंड की टीम की इस साल हालत काफ़ी ख़राब रही क्योंकि उन्हें लगातार नौ वनडे में हार का सामना करना पड़ा. पहले बांग्लादेश गई न्यूज़ीलैंड की टीम को मेज़बानों ने 4-0 से हराया.

उसके बाद जब टीम भारत पहुँची तो भारत ने कई वरिष्ठ खिलाड़ियों को आराम देते हुए गौतम गंभीर को कप्तानी सौंपी गई. इस टीम ने पाँच वनडे की सिरीज़ में 5-0 से जीत हासिल की.

मगर इसी साल स्पिन के महान जादूगर मुथैया मुरलीधरन ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

उन्होंने 22 जुलाई को भारत के विरुद्ध अपना 800वाँ टेस्ट विकेट लिया. वो मुरलधीरन का 133वाँ मैच था और उन्होंने कहा था कि उस मैच के बाद वह संन्यास ले लेंगे.

उस मैच में प्रज्ञान ओझा को मुरलधीरन ने आउट किया और वो ही उस मैच का अंतिम विकेट था यानी अपने टेस्ट करियर की अंतिम गेंद पर विकेट लेकर मुरलधीरन ने 800 टेस्ट विकेट पूरे कर लिए.ओझा का वो कैच महेला जयवर्द्धने ने पकड़ा.
तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर ने साल के अंत में दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध टेस्ट करियर का 50वाँ शतक लगाया

क्रिकेट की इस साल की चर्चा में सबसे पहले निस्संदेह सचिन तेंदुलकर का नाम आएगा.

साल की जब शुरुआत हुई तो सचिन तेंदुलकर को टेस्ट जगत में 50 टेस्ट शतक पूरा करने के लिए सात शतकों की ज़रूरत थी.

भारत का साल का पहला दौरा बांग्लादेश के विरुद्ध था और सचिन ने 18 जनवरी को चटगाँव टेस्ट में नॉट आउट रहते हुए 105 रन बनाए.

उसी दौरे पर सचिन ने एक हफ़्ते बाद मीरपुर में फिर शतक जड़ा और 143 रन बनाए. उनके आलोचकों ने कहना शुरू कर दिया कि सचिन तो कमज़ोर टीम के विरुद्ध अपना रिकॉर्ड मज़बूत कर रहे हैं.

मगर उसके बाद भारत पर आई दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध सचिन ने दो और शतक ठोंककर उन आलोचकों का मुँह बंद कर दिया.

पहले तेंदुलकर ने नागपुर में 100 और फिर कोलकाता में 106 रन बनाए.

पहला दोहरा शतक

इसके बाद उन्होंने आलोचकों का मुँह 24 फ़रवरी को ग्वालियर में इतिहास रचकर पूरी तरह बंद कर दिया.

दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध भारत वनडे खेलने उतरा था और सचिन तेंदुलकर ने 147 गेंदों का सामना करते हुए 25 चौके और तीन छक्के लगाकर वनडे का पहला दोहरा शतक जमा दिया.ग्वालियर के लोग इतिहास के गवाह बने. भारत ने 401 रन बनाए और दक्षिण अफ़्रीका को 153 रनों से हरा दिया.वनडे में उनकी ये उपलब्धि चमत्कारिक थी.

उन्होंने इसके बाद श्रीलंका जाकर 48वाँ और भारत में ही ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलत हुए टेस्ट में अपना 49वाँ शतक लगाया.

वर्ष का भारत का अंतिम दौरा दक्षिण अफ़्रीका का था और उस दौरे के पहले ही मैच में उन्होंने शतक जमाकर टेस्ट में 50 शतक पूरे कर लिए.


अब तो स्थिति कुछ यूँ है कि तेंदुलकर शायद हर मैच में एक नया रिकॉर्ड बना देते हैं. उन्होंने अक्तूबर में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध हुई सिरीज़ के दौरान ही टेस्ट में 14 हज़ार रन पूरे कर लिए.

सचिन ने पहली बार इस साल आईसीसी का क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर पुरस्कार जीता तो भारतीय वायु सेना ने उन्हें मानद ग्रुप कैप्टन बनाया.

वनडे और टेस्ट ही नहीं सचिन क्रिकेट के सबसे नए फ़ॉर्मेट ट्वेन्टी-20 में भी चमके जबकि इंडियन प्रीमियर लीग में उन्होंने टीम की सफल कप्तानी की और उसे फ़ाइनल में पहुँचाया.इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम रहा, हालाँकि उनकी टीम फ़ाइनल में महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स से हार गई.

सचिन के इस तरह के प्रदर्शन के बाद अब उनकी तुलना महान डॉन ब्रैडमैन से भी होने लगी है और बड़े पैमाने पर लोगों ने सचिन को सर डॉन से बेहतर बताना शुरू भी कर दिया है और उन्हें भारत रत्न देने की माँग ज़ोर पकड़ रही है.
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