भारत के लिए इस साल खेल जगत की शुरुआत ही विवाद के साथ हुई.हॉकी खिलाड़ियों ने प्रोत्साहन राशि की माँग के साथ, विश्व कप से पहले अभ्यास सत्र में शामिल होने से इनकार कर दिया.विवाद लंबा चला और तत्कालीन हॉकी इंडिया के प्रमुख एके मट्टू को इस्तीफ़ा देना पड़ा. मसला तब हल हुआ जब कुछ राज्यों की सरकारों ने और कुछ निजी संगठनों ने अपनी ओर से धन देने की बात कही.खिलाड़ियों को मनाने भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी पहुँचे तब जाकर कहीं बात बनी.
हॉकी इंडिया के चुनाव को लेकर भी साल भर विवाद होता रहा और भारतीय हॉकी महासंघ की मान्यता रद्द किए जाने को इस साल न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया.अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि देश में हॉकी की राष्ट्रीय संस्था हॉकी इंडिया है या भारतीय हॉकी महासंघ.भारतीय खेल मंत्रालय ने इस साल एक आदेश जारी करके कहा कि अब किसी भी खेल महासंघ का अध्यक्ष दो बार छह छह साल के कार्यकाल तक रह सकता है.इस पर भी काफ़ी विवाद हुआ और अभी तक ये फ़ैसला पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है.
हॉकी से आगे बढ़कर अगला विवाद क्रिकेट में इंडियन प्रीमियर लीग का हुआ जहाँ दो नई टीमों को इस बार शामिल किए जाने के बाद तत्कालीन चेयरमैन ललित मोदी ने जब ट्विटर पर शशि थरूर का नाम कोच्चि की टीम से जोड़ा तो एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ.
थरूर को तो इस्तीफ़ा देना ही पड़ा गाज़ मोदी पर भी गिरी और चिरायु अमीन ने आईपीएल का काम सँभाला.
नई गवर्निंग काउंसिल ने किंग्स एलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल के चौथे सीज़न से बाहर करने की कोशिश की मगर अदालत ने गवर्निंग काउंसिल की इन कोशिशों पर पानी फेर दिया.
मगर क्रिकेट का इस साल का सबसे बड़ा विवाद सामने आया स्पॉट फ़िक्सिंग के रूप में.आरोपों के घेरे में आए पाकिस्तान के तीन प्रमुख खिलाड़ी सलमान बट्ट, मोहम्मद आसिफ़ और मोहम्मद आमिर.गेंदबाज़ों पर आरोप था कि उन्होंने पहले से तय ओवर और गेंद पर नो बॉल फेंकी और इस जानकारी का सट्टेबाज़ों ने लाभ उठाया.खिलाड़ी ख़ुद को निर्दोष बता रहे हैं मगर उनके विरुद्ध आईसीसी की जाँच जारी है और ये खिलाड़ी निलंबित हैं.
राष्ट्रमंडल खेल
कभी ये चर्चा कि स्टेडियम समय से तैयार नहीं हो पा रहे हैं तो कभी ये कि खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार हुआ है.आयोजक ये मानने को तैयार ही नहीं दिखे कि स्टेडियम तैयार करने में देर हो रही है जबकि जगह-जगह से तैयार हुए स्टेडियम से भी पानी टपकने को लेकर काफ़ी हाय-तौबा मची.सबसे ज़्यादा बदनामी तब हुई जब खेलों से कुछ ही दिन पहले मीडिया में खेल गाँव की गंदगी की तस्वीरें आ गईं.राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर के इस बयान के बाद भारत में हलचल मच गई कि खेल गाँव तो रहने के लायक़ ही नहीं है.भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया खेलों की आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट के उस बयान पर आश्चर्यचकित रह गए जहाँ उन्होंने सफ़ाई के स्तर का ज़िक्र किया.
भनोट ने कहा, आप अगर ये पूछते हैं कि ये कमरा साफ़ है या नहीं तो मेरे हिसाब से ये साफ़ होगा मगर उन लोगों को सफ़ाई का एक स्तर चाहिए और वो स्तर मेरे या आप के स्तर से अलग हो सकता है. मगर अब हमने उनके स्तर की साफ़-सफ़ाई कराने की व्यवस्था कर दी है.
लोग इन खेलों की आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी से कुछ इस क़दर नाराज़ थे कि उदघाटन और समापन समारोह में उन्होंने कलमाड़ी की काफ़ी हूटिंग की.इसके बाद साल ख़त्म होते तक सीबीआई ने कलमाड़ी के घरों पर छापे भी मारे.यानी ऐसे खेल जो विश्व में भारत के बढ़ते प्रभुत्व का डंका बजाने वाले थे लोगों को शर्मसार कर गए.भारत की साख को धक्का लगा और आगे ओलंपिक आयोजन की आगे की किसी आशा पर भी चोट लगी.
हॉकी इंडिया के चुनाव को लेकर भी साल भर विवाद होता रहा और भारतीय हॉकी महासंघ की मान्यता रद्द किए जाने को इस साल न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया.अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि देश में हॉकी की राष्ट्रीय संस्था हॉकी इंडिया है या भारतीय हॉकी महासंघ.भारतीय खेल मंत्रालय ने इस साल एक आदेश जारी करके कहा कि अब किसी भी खेल महासंघ का अध्यक्ष दो बार छह छह साल के कार्यकाल तक रह सकता है.इस पर भी काफ़ी विवाद हुआ और अभी तक ये फ़ैसला पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है.
हॉकी से आगे बढ़कर अगला विवाद क्रिकेट में इंडियन प्रीमियर लीग का हुआ जहाँ दो नई टीमों को इस बार शामिल किए जाने के बाद तत्कालीन चेयरमैन ललित मोदी ने जब ट्विटर पर शशि थरूर का नाम कोच्चि की टीम से जोड़ा तो एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ.
थरूर को तो इस्तीफ़ा देना ही पड़ा गाज़ मोदी पर भी गिरी और चिरायु अमीन ने आईपीएल का काम सँभाला.
नई गवर्निंग काउंसिल ने किंग्स एलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल के चौथे सीज़न से बाहर करने की कोशिश की मगर अदालत ने गवर्निंग काउंसिल की इन कोशिशों पर पानी फेर दिया.
मगर क्रिकेट का इस साल का सबसे बड़ा विवाद सामने आया स्पॉट फ़िक्सिंग के रूप में.आरोपों के घेरे में आए पाकिस्तान के तीन प्रमुख खिलाड़ी सलमान बट्ट, मोहम्मद आसिफ़ और मोहम्मद आमिर.गेंदबाज़ों पर आरोप था कि उन्होंने पहले से तय ओवर और गेंद पर नो बॉल फेंकी और इस जानकारी का सट्टेबाज़ों ने लाभ उठाया.खिलाड़ी ख़ुद को निर्दोष बता रहे हैं मगर उनके विरुद्ध आईसीसी की जाँच जारी है और ये खिलाड़ी निलंबित हैं.
राष्ट्रमंडल खेल
कभी ये चर्चा कि स्टेडियम समय से तैयार नहीं हो पा रहे हैं तो कभी ये कि खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार हुआ है.आयोजक ये मानने को तैयार ही नहीं दिखे कि स्टेडियम तैयार करने में देर हो रही है जबकि जगह-जगह से तैयार हुए स्टेडियम से भी पानी टपकने को लेकर काफ़ी हाय-तौबा मची.सबसे ज़्यादा बदनामी तब हुई जब खेलों से कुछ ही दिन पहले मीडिया में खेल गाँव की गंदगी की तस्वीरें आ गईं.राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर के इस बयान के बाद भारत में हलचल मच गई कि खेल गाँव तो रहने के लायक़ ही नहीं है.भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया खेलों की आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट के उस बयान पर आश्चर्यचकित रह गए जहाँ उन्होंने सफ़ाई के स्तर का ज़िक्र किया.
भनोट ने कहा, आप अगर ये पूछते हैं कि ये कमरा साफ़ है या नहीं तो मेरे हिसाब से ये साफ़ होगा मगर उन लोगों को सफ़ाई का एक स्तर चाहिए और वो स्तर मेरे या आप के स्तर से अलग हो सकता है. मगर अब हमने उनके स्तर की साफ़-सफ़ाई कराने की व्यवस्था कर दी है.
लोग इन खेलों की आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी से कुछ इस क़दर नाराज़ थे कि उदघाटन और समापन समारोह में उन्होंने कलमाड़ी की काफ़ी हूटिंग की.इसके बाद साल ख़त्म होते तक सीबीआई ने कलमाड़ी के घरों पर छापे भी मारे.यानी ऐसे खेल जो विश्व में भारत के बढ़ते प्रभुत्व का डंका बजाने वाले थे लोगों को शर्मसार कर गए.भारत की साख को धक्का लगा और आगे ओलंपिक आयोजन की आगे की किसी आशा पर भी चोट लगी.
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