फ़ुटबॉल विश्व कप हमेशा से ही खेल प्रेमियों के बीच काफ़ी उत्साह पैदा करता है और इस बार दक्षिण अफ़्रीका में हो रहे विश्व कप के साथ भी वैसा ही हुआ.दक्षिण अफ़्रीका में हो रहे विश्व कप के आयोजन को लेकर काफ़ी लोगों में शंका थी मगर बेहद सफल ढंग से ये आयोजन हुआ.
विश्व कप से पहले और उसके दौरान गायिका शकीरा का गाना वाका-वाका काफ़ी लोकप्रिय हुआ और उसने भी इस आयोजन की सफलता में एक बड़ी भूमिका अदा की.
इससे पहले कि खेल प्रेमी मैचों और टीमों के प्रदर्शन पर चर्चा शुरू करते एक अन्य मसला वहाँ चर्चा का केंद्र बना और वो था- वुवुज़ेला.इस भोंपू की आवाज़ को लेकर कभी खिलाड़ियों ने शिकायत की तो कभी टीवी कमेंटेटरों ने. मसला ऊपर तक पहुँचा मगर इसे इस विश्व कप की पहचान मानते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.वुवुज़ेला के उसी शोर में खेल आगे बढ़ा और मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका पहले ही दौर में बाहर हो गया.
बड़ी-बड़ी टीमों से लोगों को काफ़ी उम्मीदें थीं और ख़ासकर अर्जेंटीना से क्योंकि इस बार डिएगो माराडोना उस टीम के कोच के तौर पर विश्व कप में शामिल थे.अर्जेंटीना के हर मैच में किनारे खड़े माराडोना की गोल पर ख़ुशी और नहीं हो पाने पर झुंझलाहट लोगों को याद रह गई.
फ़्रांस के बुरे प्रदर्शन के बाद कोच रेमंड डोमनेक ने जब स्ट्राइकर निकोलस एनेल्का को वापस भेजा तो उसकी वजह से टीम के अंदर काफ़ी खींचतान भी हुई और टीम की ख़राब हालत और ख़राब हो गई.
पाँच अफ़्रीकी टीमें तो पहले ही दौर में टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थीं बची हुई घाना की टीम क्वॉर्टर फ़ाइनल तक पहुँची जहाँ उसे उरुग्वे ने हराया.उरुग्वे इस बार अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से चर्चा में रही और उसके खिलाड़ी डिएगो फ़ोरलान को 'गोल्डन बूट' से भी नवाज़ा गया मगर टीम जर्मनी से हारकर चौथे स्थान पर रह गई.
जर्मनी ने क्वॉर्टर फ़ाइनल में अर्जेंटीना को हराया था और उस हार के बाद ही माराडोना को पद भी छोड़ना पड़ा.
इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान चर्चा थी एक ऑक्टोपस पॉल की भी. ये ऑक्टोपस लगातार जर्मनी के मैचों की सही भविष्यवाणी करता आ रहा था.
फ़ाइनल मैच था स्पेन और हॉलैंड के बीच और ऑक्टोपस का मत स्पेन के साथ था.मैच रोमाँचक रहा और इनिएस्ता के एकमात्र गोल की मदद से स्पेन ने पहली बार विश्व कप पर क़ब्ज़ा कर लिया.वैसे रोचक बात ये भी रही कि पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सिर्फ़ आठ गोल किए.
विश्व कप से पहले और उसके दौरान गायिका शकीरा का गाना वाका-वाका काफ़ी लोकप्रिय हुआ और उसने भी इस आयोजन की सफलता में एक बड़ी भूमिका अदा की.
इससे पहले कि खेल प्रेमी मैचों और टीमों के प्रदर्शन पर चर्चा शुरू करते एक अन्य मसला वहाँ चर्चा का केंद्र बना और वो था- वुवुज़ेला.इस भोंपू की आवाज़ को लेकर कभी खिलाड़ियों ने शिकायत की तो कभी टीवी कमेंटेटरों ने. मसला ऊपर तक पहुँचा मगर इसे इस विश्व कप की पहचान मानते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.वुवुज़ेला के उसी शोर में खेल आगे बढ़ा और मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका पहले ही दौर में बाहर हो गया.
बड़ी-बड़ी टीमों से लोगों को काफ़ी उम्मीदें थीं और ख़ासकर अर्जेंटीना से क्योंकि इस बार डिएगो माराडोना उस टीम के कोच के तौर पर विश्व कप में शामिल थे.अर्जेंटीना के हर मैच में किनारे खड़े माराडोना की गोल पर ख़ुशी और नहीं हो पाने पर झुंझलाहट लोगों को याद रह गई.
फ़्रांस के बुरे प्रदर्शन के बाद कोच रेमंड डोमनेक ने जब स्ट्राइकर निकोलस एनेल्का को वापस भेजा तो उसकी वजह से टीम के अंदर काफ़ी खींचतान भी हुई और टीम की ख़राब हालत और ख़राब हो गई.
पाँच अफ़्रीकी टीमें तो पहले ही दौर में टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थीं बची हुई घाना की टीम क्वॉर्टर फ़ाइनल तक पहुँची जहाँ उसे उरुग्वे ने हराया.उरुग्वे इस बार अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से चर्चा में रही और उसके खिलाड़ी डिएगो फ़ोरलान को 'गोल्डन बूट' से भी नवाज़ा गया मगर टीम जर्मनी से हारकर चौथे स्थान पर रह गई.
जर्मनी ने क्वॉर्टर फ़ाइनल में अर्जेंटीना को हराया था और उस हार के बाद ही माराडोना को पद भी छोड़ना पड़ा.
इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान चर्चा थी एक ऑक्टोपस पॉल की भी. ये ऑक्टोपस लगातार जर्मनी के मैचों की सही भविष्यवाणी करता आ रहा था.
फ़ाइनल मैच था स्पेन और हॉलैंड के बीच और ऑक्टोपस का मत स्पेन के साथ था.मैच रोमाँचक रहा और इनिएस्ता के एकमात्र गोल की मदद से स्पेन ने पहली बार विश्व कप पर क़ब्ज़ा कर लिया.वैसे रोचक बात ये भी रही कि पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सिर्फ़ आठ गोल किए.
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