कृत्रिम कोशिका

Saturday, February 5, 2011

कृत्रिम कोशिका बनाने को लेकर वैज्ञानिकों पर ईश्वर की भूमिका निभाने का आरोप लगा.

कृत्रिम कोशिकाओं के ज़रिए धरती पर इंसान बनाने का सपना, अंडे और मुर्गी की गुत्थी सुलझाने का दावा या फिर बूढ़े चूहों को जवान कर दिखाने का कमाल. साल 2010 में इंसान ने लगातार ईश्वर और प्रकृति से एक कदम आगे रहने की कोशिशें की. विज्ञान के लिहाज़ से अलग-अलग क्षेत्रों में कैसा रहा ये साल, आइए डालते हैं एक नज़र.

2010 की सबसे बड़ी उपलब्धि के रुप में वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम कोशिका बना कर जीव विज्ञान के क्षेत्र में तहलका मचा दिया. इस कोशिका का डीएनए पूरी तरह कृत्रिम था.माना जा रहा है कि अमरीकी अनुसंधानकर्ताओं की यह कामयाबी कृत्रिम जीवन बनाने की दिशा में एक पहल साबित होगी.

लंदन के वैज्ञानिकों ने भी एक कृत्रिम रक्त नली (रक्त धमनी) बनाने में सफलता हासिल की. बढ़ती उम्र के चलते, बाईपास सर्जरी के लिए जिन लोगों के शरीर से स्वस्थ रक्त नली मिलना मुश्किल है, उनके लिए ये कृत्रिम नली वरदान साबित होगी.

इस साल ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि हर दिन संतुलित मात्रा में एस्प्रिन का सेवन हर तरह के कैंसर से बचाव करता है. हर दिन एस्प्रिन लेने वाले मरीज़ों में कैंसर से मौत का ख़तरा 25 फीसदी तक कम हो गया.

इस बीच अमरीका के डॉक्टरों ने प्रयोगशाला से एक कदम आगे मरीज़ों के शरीर पर स्टेम कोशिकाओं के प्रयोग शुरु किए.स्टेम कोशिकाओं की ख़ासियत है कि वो शरीर में मौजूद किसी भी कोशिका का रुप ले सकती हैं.अगर ये प्रयोग सफल रहे तो कोशिकाओं के मृत होने से जुड़ी बीमारियों के इलाज और उन्हें बदलने में स्टेम कोशिकाएं चमत्कारी रुप से काम करेंगी.

कनाडा के मैक्मास्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने त्वचा की कोशिकाओं से रक्त बनाने का कारनामा भी कर दिखाया. त्वचा के तीन से चार सेंटिमीटर के हिस्से से एक वयस्क की ज़रूरत लायक खून बनाया जा सकता है.
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