बिहार चुनाव : नीतीश का तीर निशाने पर, बुझ गई लालटेन, उ़ड गई "झोप़डी"

Saturday, February 5, 2011

15वीं विधानसभा के गठन के लिए हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अगुवा व निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास के रथ पर सवार होकर जो तीर छो़डा वह निशाने पर ही लगा। नीतीश के तीर से चली इस आंधी में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद के "लालटेन" की लौ बुझ गई तो लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष रामविलास पासवान की "झोप़डी" भी उ़ड गई।
कांग्रेस के "हाथ" को तो उसने चुनावी परिदृश्य से ही ओझल कर दिया। पहली बार विकास की स्वाद चखने वाली बिहार की जनता ने पेशे से इंजीनियर नीतीश को फिर से अपने सिर आंखों पर बिठाया और विकास को और आगे ले जाने की फिर से उन्हें जिम्मेदारी सौंपी लेकिन विकास के साथ-साथ नीतीश ने जो चुनावी सोशल इंजीनियरिंग की यह उसी का कमाल था कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर तीन चौथाई बहुमत हासिल किया। निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंक़डों के मुताबिक इस चुनाव में जनता दल (युनाइटेड) को 115 सीटें मिलीं जबकि उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 91 सीटें मिलीं। दोंनों दलों को 206 सीटों पर जीत मिली है जबकि राजद (22) और लोजपा (3) गठबंधन 25 सीटों तक सिमटकर रह गया। पूर्व मुख्यमंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राब़डी देवी राघोपुर और सोनपुर दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव हार गई हैं।
कांग्रेस को महज चार सीटें ही मिल सकीं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महबूब अली कैसर और साधु यादव को भी चुनाव में हार झेलनी प़डी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को चुनाव में महज एक सीट से संतोष करना प़डा जबकि झारखण्ड में भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन सरकार चला रही झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बिहार में भी अपना खाता खोल लिया। उसे चकाई सीट पर जीत मिली। छह सीटें अन्य के खाते में गई। बहरहाल, नीतीश शुक्रवार को पटना के ऎतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले, आज सुबह उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल देवानंद कुंवर से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंपा।
राजभवन के सूत्रों के मुताबिक नीतीश दोपहर में राजभवन पहुंचे और औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। नीतीश ने इसे विकास व बिहार की जनता की जीत बताया है और कहा है कि बिहार ने इस चुनाव में एक नई कहानी लिख दी है। नतीजों व रूझानों से जीत के प्रति आश्वस्त होने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए नीतीश परिणामों और रूझानों पर खुशी जताते हुए कहा कि बिहार में विकास की जीत हुई है। पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में नीतीश ने कहा, ""यह बिहार के लोगों की जीत है। इसे मैं राजग की जीत के रूप में नहीं देखता हूं।"" उन्होंने कहा, ""बिहार के लोगों के समक्ष एक प्रश्A था कि वे आगे बढ़ेंगे या फिर अंधकार युग की ओर लौटेंगे। बिहार के लोगों ने आगे बढ़ने का फैसला किया है। इसलिए यह उनकी जीत है।"" नीतीश ने कहा, ""इस मौके पर मैं प्रदेश की जनता को एक ही वचन देना चाहूंगा और वह यह है कि जिस प्रकार हमने पिछले पांच सालों में मेहनत की, आने वाले दिनों में हम उससे भी ज्यादा मेहनत करेंगे।
मेहनत से पीछे नहीं हटेंगे। बीच-बीच में प्रकृति भी इम्तहान लेती रहती है लेकिन हम इससे विचलित नहीं होंगे।"" उन्होंने कहा, ""चुनाव में विकास जीत गया है। स्पष्ट है कि बिहार की जनता बिहार को तरक्की के रास्ते पर देखना चाहती है। लोगों ने मतदान में जो उत्साह दिखाया, युवाओं और खासकर महिलाओं ने जिस प्रकार आगे बढ़कर मतदान में हिस्सा लिया, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।"" बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नई दिल्ली में कहा कि बिहार में कांग्रेस को नए सिरे से शुरूआत करनी होगी। केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने बिहार में राजग की चुनावी जीत के लिए नीतीश को बधाई दी। चिदम्बरम ने कहा कि बिहार में विकास मॉडल की जीत हुई है। चिदम्बरम ने संसद के बाहर संवाददाताओं को बताया, ""बिहार में विकास का मुद्दा हावी रहा। हमें नीतीश कुमार और भाजपा को अच्छे प्रदर्शन के लिए बधाई देनी चाहिए। हम एक प्रगतिशील और आशावादी सरकार के लिए उन्हें अपनी शुभकामनाएं देते हैं।"" भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि इन परिणामों से साबित हुआ है कि 21वीं सदी में भारत की राजनीति विकास की राजनीति होगी, जातिवाद की नहीं। गडकरी ने कहा कि राजग गठबंधन को मिली इस अभूतपूर्व सफलता से देश राजनीति की दिशा तय होगी। उन्होंने कहा कि राजग को कार्यकर्ताओं की एकजुटता के चलते यह सफलता मिली है। जद (यु) के अध्यक्ष शरद यादव ने भी राजग को मिली सफलता को विकास का परिणाम करार देते हुए कहा कि बिहार की जीत जनता की जीत है। राजग गठबंधन की सरकार का नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे थे इसलिए जीत का सबसे ज्यादा श्रेय उन्हीं को जाता है। शरद यादव ने एक सवाल पर कहा कि लालू प्रसाद मंडल की राजनीति को ठीक तरह से नहीं समझते हैं। प्रदेश में राजग सरकार ने राम मनोहर लोहिया की सामाजिक विषमता के साथ आर्थिक विषमता दूर करने की सोच के तहत काम किया जबकि लालू इस तरह की राजनीति को नहीं समझते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने कांग्रेस और विपक्ष के अन्य नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि इन परिणामों से साबित हुआ है कि अब क्षमतावान नेताओं की जीत होगी, परिवारवादियों की नहीं। जेटली ने कहा कि पिछले पांच साल में जिस तरह से राजग सरकार ने कामकाज किया उससे बिहार की जनता में उम्मीद पैदा हुई है। पहले जहां डर और निराशा के बीच मतदान होता था वहीं इस चुनाव में उम्मीद और आशा के चलते मतदान हुआ है। राजग सरकार ने बिहार में ब़डा परिवर्तन किया है। जेटली ने कहा कि विरोधी दल बिहार की जनता की उम्मीदों को समझ नहीं पाए। एक ओर जहां 40-40 साल से जनता के लिए संघर्ष करने वाले नेता थे वहीं दूसरी ओर पारिवारिक ग्लैमर का प्रदर्शन करने वाले दल थे। बिहार की जनता ने साबित कर दिया कि क्षमतावान नेताओं की जीत होगी, परिवारवादियों की नहीं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे विकास की जीत करार देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। मोदी ने अहमदाबाद में कहा, ""यह जीत विकास की जीत है। यह विकास की सोच रखने वालों की जीत है। मैं इस ब़डी जीत के लिए नीतीश कुमार और सुशील मोदी को बधाई देता हूं। मुझे पूरा भरोसा है कि बिहार पूरे देश के विकास में ब़डी भूमिका निभाएगा। "" उधर, राज्य में करारी हार झेल रहे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि इस हार से पार्टी निराश हैं लेकिन राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और हम एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। प्रसाद ने कहा कि हम गरीबों के हितों की ल़डाई जारी रखेंगे और विपक्ष के तौर पर अपनी रचनात्मक भूमिका का निर्वाह करेंगे।
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