अफ़ग़ानिस्तान

Saturday, February 5, 2011

इराक़ के बाद अगर अमरीका ने किसी देश में अपना काफ़ी कुछ दाँव पर लगाया है तो वे है अफ़ग़ानिस्तान. 2001 में ब्रिटेन और अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हवाईहमले किए थे. तब से लेकर अब तक वहाँ उठापटक रही है.

2010 अफ़ग़ानिस्तान के लिए काफ़ी अहम साल रहा.  पेंटागन ने साफ़ तौर पर माना है कि अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथियों की ताकत बढ़ रही है और हिंसा नए स्तर पर पहुँच गई है.

वहीं बराक ओबामा ने कहा दिया है कि अमरीका जुलाई 2011 में सैनिक हटाना शुरु कर देगा. जबकि नैटो ने वर्ष 2014 के अंत तक सुरक्षा की कमान अफ़ग़ान सैनिकों के हाथों में सौंपे जाने की योजना को स्वीकृति दे दी है.

पर क्या अफ़ग़ान सुरक्षाबल अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा का ज़िम्मा लेने के लिए सक्षम हैं? वहाँ तालिबान,शासन,तस्करी और भ्रष्टाचार को लेकर समय-समय पर चिंता जताई जा चुकी है. विकीलीक्स में भी अमरीकी राजनयिकों के संदेश राष्ट्रपति करज़ई समेत वहाँ के नेताओं को लेकर यही शंका जताते हैं.

विकीलीक्स के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान युद्ध पर अमरीका अपनी करीबी सहयोगी ब्रिटेन से भी बेहद नाख़ुश है.

इस सबको देखते हुए अमरीका और नैटो के सामने चुनौती ये है कि 2014 में उनके जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों में कमान लड़ाकों और मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के हाथों में न चली जाए. कैसा होगा 2015 का अफ़ग़ानिस्तान?..इंतज़ार सबको है.

बर्मा

दुनिया का एक छोटा सा देश बर्मा जहाँ की एक बड़ी राजनीतिक नेता आंग सान सूची बरसों बाद अपने ही घर में नज़रबंद रहने के बाद नवंबर में रिहा हुईं. वे पिछले 21 सालों में से 15 साल नज़रबंद रही हैं.

बर्मा में 20 साल बाद पहली बार चुनाव हुए जिसमें सेना समर्थित पार्टी ने जीत का दावा किया है. सूची की पार्टी ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था क्योंकि ऐसा करने के लिए पार्टी को सूची को निकालना पड़ता.
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