राष्ट्रमंडल खेलों में लूटखसोट और घोटालों का भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) पारदर्शी भाषा में खुलासा कर दिया

Saturday, August 6, 2011

राष्ट्रमंडल खेलों में हुई अभूतपूर्व लूटखसोट और घोटालों का भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने बड़ी बेबाकी और पारदर्शी भाषा में खुलासा कर दिया है। संसद में पेश कैग की रिपोर्ट में आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी की नियुक्ति, खेलों की निर्माण व विकास योजना, वित्त प्रबंधन और खेल के उद्घाटन से लेकर समापन समारोह तक हर कहीं अरबों रुपये की बरबादी और बंदरबांट के अलावा कुछ नजर नहीं आता। इस बरबादी में अकेले कलमाड़ी और उनकी टीम ही नहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री शाली दीक्षित और प्रधानमंत्री कार्यालय भी शामिल है।

निर्माण योजनाओं की लागत 9 गुना

सुरेश कलमाडी की आयोजन समिति (ओसी) के अध्यक्ष पर नियुक्त के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सभी नियमों और आपत्तियों को ताक पर रख दिया। करीब 750 पन्नों की कैग रिपोर्ट में यह साबित किया गया है। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी तमाम ठेकों में करोड़ों का चूना लगाने का जिम्मेदार ठहराया गया है। फ्लाईओवर की ही मिसाल लें तो इनके निर्माण की लागत नौ गुना ज्यादा पड़ी। स्ट्रीट लाइट से लेकर सड़कों के सौंदर्यीकरण के और साजोसामान और निर्माण में पांच गुना तक ज्यादा खर्च करने में भी शीला सरकार ने संकोच नहीं किया। सड़कों के सौंदर्यीकरण पर 101 करोड़ रुपये तक लागत बढ़ा गड़बड़ी की गई।

कैसे कैसे कीं गड़बड़ियां

कैग ने खेल का ठेका मिलने के बाद से आयोजन पूरा होने तक हर पड़ाव पर हुई गड़बड़ियों का कच्चा चिठ्ठा खोला है। उसके अनुसार, सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था के लिए विदेशी कंपनी का सामान मंगाने के शीला सरकार के फैसले से 31.07 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए। सड़कों पर बनाए गए साइन बोर्ड पसंद नहीं आने पर शीला के अचानक उन्हें बदलने के फैसले से 14.88 करोड़ का नुकसान हुआ।

खेलों इंतजाम में लगी एजेंसियों में समन्वय नहीं

ओसी की तरफ से अधिकतर नियुक्तियां मनमाने तरीके से होने की बात भी रिपोर्ट में है। रिपोर्ट बताती है कि आयोजन का जिम्मा मिलने के बाद सात साल का वक्त तैयारियों को मिला था जिसमें से ज्यादातर ओसी ने गंवा दिया। ओसी की नियुक्ति ही फरवरी 2005 में की गई। खेल स्थलों की तैयारी को लेकर परामर्श के लिए ईएएस की नियुक्ति ही जुलाई 2006 में हुई। सभी एजेंसियों में समन्वय के अभाव का खुलासा भी कैग ने किया है।

कैग की रिपोर्ट की खास बातें

--तत्कालीन खेल मंत्री सुनील दत्त के गंभीर विरोध के बावजूद 2004 में पीएमओ की सिफारिश पर कलमाडी को ओसी अध्यक्ष बनाया गया।
--आयोजन समिति से लेकर दिल्ली सरकार तक ने बोली के नियमों को ताक पर रख टेंडर देने में जल्दबाजी की। हर काम में जानबूझकर देर की गई ताकि फिर समय की कमी का हवाला देकर किसी भी टेंडर के लिए जल्दबाजी में फैसला करने का बहाना मिल जाए।
--ओसी ने कई अहम कामों के लिए ऐसी एजेंसियों का चुनाव किया जिनका न तो कोई तजुर्बा था और न ही उनकी गिनती काबिल कंपनियों में होती है।
--रिपोर्ट में ओसी, पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय, जीओएम, दिल्ली सरकार तक सभी को नाप दिया गया है। कैग के अनुसार, खेलों की तैयारियों की लूट में एमसीडी, डीडीए और सीपीडब्ल्यूडी ने भी कसर नहीं छोड़ी।

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